शिक्षा में मानववादी पाठ्यक्रम लागू हो

शिक्षा व्यवस्था किसी भी राष्ट्र के निर्माण की मूलभूत इकाई है. अतः भारत की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन के लिए अर्जक संघ निम्नलिखित माँग करता है:
1. शिक्षा का उद्देश्य राष्ट्रीय स्वाभिमान एवं एकता कायम करना हो.

2. वर्तमान ब्राह्मणवादी शिक्षा पाठ्यक्रम को तुरंत समाप्त किया जाय और मानव समतापरक, मानववादी पाठ्यक्रम लागू किया जाय.

3. कक्षा 1 से 8 तक राष्ट्रीयता, नागरिकता, भूगोल, गणित और वर्तमान वैज्ञानिक उपलब्धियों की ही शिक्षा दी जाय और ब्राह्मणवादी पंचांग-पुनर्जन्म, भाग्यवाद, जाति-पाँति, ऊँच-नीच का भेदभाव और चमत्कार की शिक्षा किसी भी स्तर पर न दी जाय.


4. संपूर्ण भारतीय शिक्षा में एकरूपता लाने के लिए भारतीय संविधान में संशोधन करके शिक्षा को केन्द्रीय विषय बनाया जाय ताकि संपूर्ण देश की एकता के लिए एक-सी राष्ट्रीय शिक्षा दी जी सके और सभी लड़के व लड़कियाँ एक से राष्ट्रीयकृत विद्यालयों में पढ़ सकें.

5. हर स्तर की शिक्षा में मानव-मानव की बराबरी का मानवीय सिद्धांत प्रतिपादित रहे और इसके विपरीत मान्यता को निंदनीय कहा जाय.

6. उपर्युक्त उद्देश्य की पूर्ति हेतु आठवीं कक्षा के पश्चात्‌ शिक्षा के दो भाग कर दिए जाएँ- (क) तकनीकी और औद्योगिक शिक्षा तथा (ख) माध्यमिक और उच्च शिक्षा.

7. आठवीं तक की शिक्षा अनिवार्य और मुफ्त हो.

8. विद्यालयों में परस्पर समता का व्यवहार और आचरण करना अनिवार्य हो, यानी बोलने-चलने, उठने-बैठने और खान-पान में परस्पर सचेत समता बरतें.

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