मानववादी प्रश्नोत्तरी

प्रश्न- मानववाद क्या है ?
उत्तर-मानववाद वह विचारधारा है जो मानव मात्र के लिए समता, सुख और समृद्धि का मार्ग निरूपण करती है. 

प्रश्न- मानव समता से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर- बोलने, चलने, उठने, बैठने, खान और पान में जो कोई जैसे व्यवहार दूसरों से अपने लिए चाहता है वैसा ही वह दूसरो के साथ खुद करे यही छ: मानव समताये हैं.

प्रश्न- ये छ: मानव समतायें क्यों आवश्यक हैं ?
उत्तर- हर मानव - मान सम्मान चाहता है और सम्मान एक मानव को दूसरे मानव से ही मिलता है. बोलने आदि की उक्त छ: क्रियाओ में कौन किसका सम्मान करता है, इसका पता चलता है. अत: हर मानव दूसरे मानव को सम्मान दे तभी हर मानव की सम्मान की भूख शांत होगी और मानव मन सुखी होगा. इसलिए सभी मानवों को मन का सुख देने के लिए उक्त छ: समतायें आवश्यक हैं.

शिक्षा में मानववादी पाठ्यक्रम लागू हो

शिक्षा व्यवस्था किसी भी राष्ट्र के निर्माण की मूलभूत इकाई है. अतः भारत की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन के लिए अर्जक संघ निम्नलिखित माँग करता है:
1. शिक्षा का उद्देश्य राष्ट्रीय स्वाभिमान एवं एकता कायम करना हो.

2. वर्तमान ब्राह्मणवादी शिक्षा पाठ्यक्रम को तुरंत समाप्त किया जाय और मानव समतापरक, मानववादी पाठ्यक्रम लागू किया जाय.

3. कक्षा 1 से 8 तक राष्ट्रीयता, नागरिकता, भूगोल, गणित और वर्तमान वैज्ञानिक उपलब्धियों की ही शिक्षा दी जाय और ब्राह्मणवादी पंचांग-पुनर्जन्म, भाग्यवाद, जाति-पाँति, ऊँच-नीच का भेदभाव और चमत्कार की शिक्षा किसी भी स्तर पर न दी जाय.