प्रश्न- मानववाद क्या है ?
उत्तर-मानववाद वह विचारधारा है जो मानव मात्र के लिए समता, सुख और समृद्धि का मार्ग निरूपण करती है.
प्रश्न- मानव समता से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर- बोलने, चलने, उठने, बैठने, खान और पान में जो कोई जैसे व्यवहार दूसरों से अपने लिए चाहता है वैसा ही वह दूसरो के साथ खुद करे यही छ: मानव समताये हैं.
प्रश्न- ये छ: मानव समतायें क्यों आवश्यक हैं ?
उत्तर- हर मानव - मान सम्मान चाहता है और सम्मान एक मानव को दूसरे मानव से ही मिलता है. बोलने आदि की उक्त छ: क्रियाओ में कौन किसका सम्मान करता है, इसका पता चलता है. अत: हर मानव दूसरे मानव को सम्मान दे तभी हर मानव की सम्मान की भूख शांत होगी और मानव मन सुखी होगा. इसलिए सभी मानवों को मन का सुख देने के लिए उक्त छ: समतायें आवश्यक हैं.
उत्तर-मानववाद वह विचारधारा है जो मानव मात्र के लिए समता, सुख और समृद्धि का मार्ग निरूपण करती है.
प्रश्न- मानव समता से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर- बोलने, चलने, उठने, बैठने, खान और पान में जो कोई जैसे व्यवहार दूसरों से अपने लिए चाहता है वैसा ही वह दूसरो के साथ खुद करे यही छ: मानव समताये हैं.
प्रश्न- ये छ: मानव समतायें क्यों आवश्यक हैं ?
उत्तर- हर मानव - मान सम्मान चाहता है और सम्मान एक मानव को दूसरे मानव से ही मिलता है. बोलने आदि की उक्त छ: क्रियाओ में कौन किसका सम्मान करता है, इसका पता चलता है. अत: हर मानव दूसरे मानव को सम्मान दे तभी हर मानव की सम्मान की भूख शांत होगी और मानव मन सुखी होगा. इसलिए सभी मानवों को मन का सुख देने के लिए उक्त छ: समतायें आवश्यक हैं.